Literature

मख़मली पल्लू का बिस्तर याद है By Shreyash Tripathi

ग़ज़ल मख़मली पल्लू का बिस्तर याद है   मख़मली पल्लू का बिस्तर याद है शहर-ए-गम में गांव का घर याद है   इक शराबी बाप माँ को मारता वहशियत का ज़हर मंजर याद हैं   पीठ पर अब भी हरे हैं, ज़ख्म सब अपनों का मारा वो ख़ंजर याद है   चार – सू फैली …

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अगर है इश्क़ सच्चा तो मुहब्बत कर By Shreyash Tripathi

ग़ज़ल अगर है इश्क़ सच्चा तो मुहब्बत कर   अगर है इश्क़ सच्चा तो मुहब्बत कर ज़माने भर से चाहे फिर बग़ावत कर   ख़ुदा सुनता पुजारी-मौलवी की बस शराबी हूँ मुझे मत कह इबादत कर   मिरे दर से न लौटे कोई भी भूखा मिरे मौला मिरे ऊपर इनायत कर   खिली है धूप …

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