Literature

भला ख़ामोश क्यों रहना हज़ारों बात बाकी हैं By Shreyash Tripathi

ग़ज़ल भला ख़ामोश क्यों रहना हज़ारों बात बाकी हैं भला ख़ामोश क्यों रहना हज़ारों बात बाकी हैं बयान-ए-दर्द-ओ-गम करने को तो नग़्मात बाकी हैं खफ़ा लगता हूँ मैं तुझको मगर मैं सच बताऊं तो तिरे ख़ातिर, मिरे दिल में कई जज़्बात बाकी हैं रफाकत को निभाते वक्त सालों हो गए हैं पर हमारे दरमियाँ अब …

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झुके कंधे बताते हैं कि कितना भार होता है By Shreyash Tripathi

ग़ज़ल झुके कंधे बताते हैं कि कितना भार होता है   झुके कंधे बताते हैं कि कितना भार होता हैअकेले बाप के ऊपर यहाँ परिवार होता है   कि जिसने मुफ़्लिसी में भी कभी बेचा नहीं ख़ुद कोवही औलाद की ख़ातिर मगर बाज़ार होता है   अँधेरे से कमा कर रौशनी सब के लिए लाएदिया …

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