मिरी इस ज़िन्दगी की तुम दवा कर दो By Ashutosh Pandey

ग़ज़ल मिरी इस ज़िन्दगी की तुम दवा कर दो सुनो मेरी कज़ा की तुम दुआ कर दो   युँ कहने को इबादत सब यहाँ करते ख्यालों में मुझे तुम भी खुदा कर दो   बिछड़ना है ‘ कहने से हो घबराती अजी आओ युँ मिल-मिलकर जुदा कर दो   इधर मैंने चरागों में है घी …

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बाग़ में से जब वो गुज़री फूल बे-कल हो गए By Ashutosh Pandey

ग़ज़ल बाग़ में से जब वो गुज़री फूल बे-कल हो गए उस फ़ज़ा की फिर महक से सारे पागल हो गए   सूखे जब इक फूल ने फिर अपना दुख ज़ाहिर किया उसने देखा आसमाँ को और बादल हो गए   इक दफ़ा निकलीं थी छत पर अपनी ज़ुल्फ़ें खोल वो चाँद तारे सब के …

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इश्क़ लिखता दर्द लिखता मर्ज़ लिखता शाइरी में By Ashutosh Pandey

ग़ज़ल इश्क़ लिखता दर्द लिखता मर्ज़ लिखता शाइरी में लिखता हूँ अब ज़िन्दगी का कच्चा चिट्ठा शाइरी में बिछड़ा हूँ तो क्या हुआ दीदार उनका रोज़ करता ऊला में भी सानी में भी उनसे मिलता शाइरी में सोच कितने कीमती थे पल जो तेरे साथ गुज़रे कतरा-कतरा बिक गया पर अब है कर्ज़ा शाइरी में …

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