आदमी की है ये कोशिश नौकरी चलती रहे By Shreyash Tripathi

ग़ज़ल

आदमी की है ये कोशिश नौकरी चलती रहे

 

आदमी की है ये कोशिश नौकरी चलती रहे

इस वबा में घर में उसके सरख़ुशी चलती रहे

 

शहर सारा जल भी जाये, आग में मतलब नहीं

आज सब की है ये कोशिश जिंदगी चलती रहे

 

भीड़ ने पत्थर उठाकर कर दिया ज़ाहिर यही

देश मिट जाये मगर नेतागिरी चलती रहे

 

वक्त को कह कर बुरा ये भीख लेंगे मांग पर

मुफ़्लिसी के बोझ नीचे मयकशी चलती रहे

 

झुक रहे महबूब आगे भूल कर अपनी अना

आन तक आड़े न आये आशिक़ी चलती रहे

 

सब मुझे पागल बुलायें, है मुझे मंजूर ये

बस खुदा! दे इल्म इतना शाइरी चलती रहे

 

साँप सारे है यहाँ “साहेब” को सब था पता

जान कर ख़ामोश था के दोस्ती चलती रहे

-Shreyash Tripathi
@saheb_shrey

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