मिरी इस ज़िन्दगी की तुम दवा कर दो By Ashutosh Pandey

ग़ज़ल

मिरी इस ज़िन्दगी की तुम दवा कर दो

सुनो मेरी कज़ा की तुम दुआ कर दो

 

युँ कहने को इबादत सब यहाँ करते

ख्यालों में मुझे तुम भी खुदा कर दो

 

बिछड़ना है ‘ कहने से हो घबराती

अजी आओ युँ मिल-मिलकर जुदा कर दो

 

इधर मैंने चरागों में है घी डाला

बुरा करना है तो आकर हवा कर दो

 

मिरी गज़लों को अश्कों से नवाज़िश दे

ये दिल के शाख़ का पत्ता हरा कर दो

 

यहाँ दिनभर ही लिखता है तुझे ‘आबिद’

कभी तुम भी इसे पढ़ कर सफ़ा कर दो

-Ashutosh Pandey
@p.a.n.d.e.y_j.i

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